Antarvasana-hindi-kahani

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अर्पिता शर्मा (काल्पनिक)

एक अच्छा साहित्यकार कभी भी अंतर्वासना का ग्लोरिफिकेशन नहीं करता। वह तो बस एक आईना दिखाता है। जिस समाज में मानसिक स्वास्थ्य पर बात करना आज भी अपराध है, उस समाज के लिए अंतर्वासना पर लिखी गई कहानियाँ एक तरह से 'कैथार्सिस' (भावनात्मक शोधन) का काम करती हैं।

"अंतर्वासना" का शाब्दिक अर्थ है - भीतर रहने वाली वासना, या मन के गहरे अवचेतन में छिपी हुई लालसा। यह वो इच्छा है जिसे हम समाज, परिवार या स्वयं के नैतिक मूल्यों के डर से बाहर निकलने नहीं देते। यह लेख विस्तार से बताएगा कि आखिर 'अंतर्वासना हिंदी कहानी' क्या है, उसकी विशेषताएं क्या हैं, और क्यों यह विधा आज के समय में अधिक प्रासंगिक हो गई है। कोई भी कहानी तब तक शक्तिशाली नहीं बनती जब तक वह मनोविज्ञान की जमीन पर न उतरे। सिगमंड फ्रायड ने 'अवचेतन मन' (Subconscious Mind) की बात की थी, जहाँ हमारी दबी हुई इच्छाएँ, दमित कामनाएँ और अधूरे सपने रहते हैं। 'अंतर्वासना हिंदी कहानी' बिल्कुल इसी क्षेत्र में प्रवेश करती है। antarvasana-hindi-kahani

वह बिजली की तरह पीछे हटी। दरवाजे पर उसकी सहेली प्रीति खड़ी थी।

यहाँ अश्लीलता नहीं, संवेदनशीलता काम करती है। शब्द सीधे दिल पर चोट करते हैं, शरीर पर नहीं। 'अंतर्वासना हिंदी कहानी' अश्लील साहित्य (Adult literature) नहीं है; यह मनोवैज्ञानिक यथार्थवादी साहित्य है। देर रात करीब बारह बजे

एक दिन, देर रात करीब बारह बजे, मूसलाधार बारिश हो रही थी। अनिल जी मुंबई में थे। विनीता ने नीचे कारपोर्ट की लाइट देखी। कार्तिक पानी में भीग रहा था, और उसके सिर से खून बह रहा था - पार्किंग में फिसल कर वह गिर गया था।

रात को विनीता अकेले कमरे में रोई। उसने तय कर लिया - कल कार्तिक को नौकरी से निकाल दूंगी। लेकिन अगली सुबह जब उसने कार्तिक को गाड़ी धोते देखा, तो उसकी सारी 'अंतर्वासना' फिर से जाग उठी। वह खिड़की से झाँकती रही, और उसके हाथ की चूड़ियाँ बेवजह खनक उठीं। संवेदनशील और सभ्य है

जब एक लेखक अंतर्वासना पर कहानी लिखता है, तो वह एक ऐसे पात्र का निर्माण करता है जो बाहरी तौर पर सामान्य, संवेदनशील और सभ्य है, लेकिन उसके अंदर आग का एक कुंदन धधक रहा है। यह आग कभी अवैध प्रेम की होती है, कभी ईर्ष्या की, तो कभी किसी ऐसे सपने की जिसे पूरा करने का समाज ने कोई रास्ता नहीं दिया।