धन्यवाद। — आपकी अपनी कहानीकार
इसी सोमवार से उसने संकल्प लिया कि वह बदलेगी।
गुरुवार के दिन स्कूल में स्पोर्ट्स पीरियड था। टीचर ने सभी को दौड़ने के लिए प्रोत्साहित किया। शुरू में कविता को बुरा लगा, लेकिन दौड़ते हुए उसके चेहरे पर मुस्कान आ गई। सबकी राय सुनो
इस पर कविता ने अपनी डायरी में लिखा: “स्कूल सिर्फ किताबें नहीं पढ़ाता, बल्कि जीवन जीने के सबक भी सिखाता है।” अब तक कविता पूरी तरह बदल चुकी थी – लेकिन एक नई समस्या आई। उसने पढ़ाई इतनी ज़्यादा बढ़ा दी कि खेलने-कूदने का समय ही नहीं बचा। नतीजन, वह थकान महसूस करने लगी।
✅ सोमवार – नई आदत ✅ मंगलवार – सार्थक मनोरंजन ✅ बुधवार – कठिनाइयों से सीख ✅ गुरुवार – बैलेंस ✅ शुक्रवार – जश्न और साझा करना सबकी राय सुनो
कविता को लगा जैसे उसके प्रयासों पर पानी फिर गया। वह उदास होकर घर लौटी। तब पिताजी ने कहा, “बेटा, सबकी राय सुनो, पर खुद पर विश्वास रखो। तुमने जो शुरू किया है, उसे जारी रखो।”
जब उसने मंच पर कदम रखा, तो हॉल तालियों से गूँज उठा। उसने बताया कि कैसे एक स्कूली लड़की के जीवन में बड़ा बदलाव ला सकती है। सबकी राय सुनो
स्कूल पहुँची तो दोस्तों ने पूछा, “आज इतनी तरोताज़ा क्यों हो?” कविता ने मुस्कुराकर जवाब दिया, “क्योंकि आज मैंने डिसिप्लिन को अपना दोस्त बना लिया है।” शाम को स्कूल खत्म होने के बाद कविता अक्सर टीवी या फोन में लग जाती थी। लेकिन मंगलवार के दिन उसने तय किया कि वह एंटरटेनमेंट का सार्थक उपयोग करेगी। उसने अपनी छोटी बहन के साथ मिलकर एक छोटा सा नाटक लिखा – “परीक्षा की तैयारी” नाम से।