लेकिन जब वही पिता पहली बार 'तू' या 'तेरे' का प्रयोग करता है, तो इसका मतलब होता है – "मैं तुम्हारी स्ट्रेंथ और इंडिपेंडेंस को मानता हूँ, पर तुम्हारी फिक्र मुझे बेचैन करती है।" काव्या आज एक सफल कंटेंट क्रिएटर हैं। उन्होंने हमें बताया कि उस रात के बाद से उनके पिता अब अक्सर उन्हें 'तू' कहकर बुलाते हैं।
बस यही एक वाक्य। काव्या के कान थम गए। पहली बार उन्होंने अपने पिता को अपने लिए ‘तू’ शब्द का इस्तेमाल करते सुना। वह स्तब्ध रह गई।
लेकिन आज की यह कहानी थोड़ी हटकर है। यह कहानी है उस बेटी की, जिसने 25 साल की उम्र में अपने पिता के मुंह से पहली बार सुना – – और यही छोटा सा ‘तू’ उसके लिए पूरी दुनिया की तमाम शाबाशियों से बड़ा हो गया।
क्या आपके साथ भी ऐसा हुआ है? अगर हां, तो अपनी स्टोरी neeche comments में जरूर share करें। और अगर नहीं, तो ये आर्टिकल अपने पापा को forward करें – शायाद कल से वो आपको ‘तू’ बुलाना शुरू कर दें।
अगर आप भी एक पिता हैं, और आपकी बेटी 20 से ऊपर है, तो एक बार जरूर सोचिए – क्या आपने उसे पिछले 5 साल में ‘तू’ कहा है? क्या आपने उससे बिना किसी वजह के गले मिलने की कोशिश की है?
"मैं अपने आपको रोक नहीं पाई। मैंने दौड़कर उन्हें गले लगा लिया। वो पहली बार था, जब मेरे पिता ने भी मुझे कसकर थामा। उस छोटे से ‘तू’ ने 25 साल की बेटी को फिर से बच्चा बना दिया।" हमारे एंटरटेनमेंट डेस्क ने जब इस कहानी पर रिसर्च शुरू की, तो हमने पाया कि हाल के बॉलीवुड और वेब सीरीज में भी इसी ‘नए पिता’ का ट्रेंड दिख रहा है।
फिल्में जैसे 'English Vinglish' में श्री राव (अदिल हुसैन) या 'Dangal' में महावीर सिंह फोगाट – चाहे वो कितने सख्त क्यों न हों, आखिरी सीन में उनका ‘बेटी को तू कहना’ या ‘गले लगाना’ ही पूरे सिनेमा का सबसे बड़ा emotional beat बनता है। मनोवैज्ञानिकों के अनुसार, भारतीय पिता अक्सर 'आप' शब्द का इस्तेमाल एक सुरक्षा कवच की तरह करते हैं। उन्हें डर है कि कहीं 'तू' बोलने से औपचारिकता खत्म न हो जाए और बेटी उनके कंट्रोल से बाहर न निकल जाए।
समय बहुत तेज़ भाग रहा है। फिल्मी डायलॉग नहीं, बल्कि असली जिंदगी में एक छोटा सा ‘तू’ सारी दूरियाँ मिटाने के लिए काफी है। यह कहानी केवल एक बेटी की नहीं है। यह हर उस बेटी की कहानी है, जो अपने पिता के मुंह से एक दिन 'आप' की जगह 'तू' सुनने का इंतजार करती है।